18 October 2026

अंकिता को न्याय या चुनावी मुद्दे की तलाश? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

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अंकिता को न्याय या चुनावी मुद्दे की तलाश? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

 

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। पहाड़ की बेटी को न्याय दिलाने के नाम पर राजनीति हो रही है न्यायालय के फैसले और मौजूदा सीबीआई जांच के बीच कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और सीबीआई जांच जारी है, तो क्या राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस साक्ष्य जांच एजेंसी को उपलब्ध कराना अधिक जरूरी नहीं है?

 

धामी सरकार में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक हुई कार्रवाई के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—

 

– तत्काल कार्रवाई: घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

– एसआईटी का गठन: मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया और साक्ष्य जुटाए गए।

– मजबूत पैरवी: अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में मामले की पैरवी की और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला।

– आजीवन कारावास की सजा: अदालत ने मामले में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

– परिजनों के सुझावों पर विचार: मामले की पैरवी कर रहे सरकारी अधिवक्ता को बदलने सहित परिजनों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर कदम उठाए गए।

– आर्थिक एवं रोजगार संबंधी सहायता: पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।

– सीबीआई जांच: मामले से जुड़े उठाए गए सवालों और वीआईपी प्रकरण की पड़ताल के बीच अब सीबीआई जांच कर रही है, ताकि संबंधित तथ्यों की जांच हो सके।

 

 

 

वीआईपी प्रकरण में सीबीआई जांच, परिजनों की अधिकारियों से मुलाकात

 

अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी प्रकरण में सीबीआई की जांच जारी है। आज सुरेश राठौड़ से पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं अंकिता के माता-पिता दिल्ली में सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। ऐसे में जांच एजेंसी के सामने संबंधित सवालों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल का रास्ता खुला है।

 

जांच की दिशा और निष्कर्ष तय करना सीबीआई का काम है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानून की प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। यदि किसी के पास वीआईपी प्रकरण से जुड़ा कोई ठोस साक्ष्य है, तो उसे जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए, ताकि हर पहलू की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।

 

पहाड़ की बेटी के नाम पर सियासत कब तक?

 

अंकिता भंडारी उत्तराखंड की बेटी थी। उसका मामला प्रदेश की संवेदनाओं, महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा है। ऐसे संवेदनशील प्रकरण पर राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेर रही है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या केवल प्रदर्शन, बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है?

 

आलोचकों का आरोप है कि कांग्रेस इस प्रकरण को राजनीतिक मुद्दा बनाकर अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यदि ऐसा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहाड़ की बेटी के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने के बजाय सभी दल जांच में सहयोग क्यों नहीं करते? न्याय की मांग तभी सार्थक होगी, जब राजनीतिक दावों से ऊपर उठकर साक्ष्यों और तथ्यों को महत्व दिया जाएगा।

 

अंकिता के माता-पिता की पीड़ा और न्याय की अपेक्षा किसी भी राजनीतिक दल के लिए प्रचार का माध्यम नहीं बननी चाहिए। सीबीआई जांच में यदि कोई नया तथ्य सामने आता है, तो उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराने या किसी की भूमिका को लेकर अपुष्ट दावे करने से बचना भी जरूरी है।

 

अब निगाहें सीबीआई जांच पर हैं। प्रदेश की जनता चाहती है कि वीआईपी प्रकरण सहित हर सवाल का जवाब तथ्यों के आधार पर सामने आए। राजनीतिक दलों को भी यह समझना होगा कि अंकिता के नाम पर सियासत करने से अधिक महत्वपूर्ण है उसकी मौत से जुड़े हर सवाल का निष्पक्ष जवाब मिलना और न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रहना।

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